Best Inspiring Poem in Hindi

Best Inspiring Poem in Hindi

हाँ-हाँ मैं तैयार हूँ, फेल होने के लिए। 
हाँ-हाँ मैं तैयार हूँ, निराशा के लिए। 
नहीं यहाँ कोई – मुझे कामियाब बनाने वाला,
नहीं यहाँ कोई – मेरे सपनों को साकार करने वाला। 
कोई नहीं है यहाँ – मेरा ख्याल रखने वाला। 
कोई नहीं है यहाँ – मुझे समझ पाने वाला। 
अरे.. हाँ-हाँ मुझे जरूरत ही क्या है ! 
मैं हूँ न – खुद को काबिल बनाने के लिए। 
अँधेरी दुनिया को, चिरागों से जगमगाने के लिए। 
हाँ-हाँ मैं तैयार हूँ, फेल होने के लिए… . . . . . . . . .||


दुःख होता है फेल होने में, तो हो जाने दे। 
तकलीफ होती है मुस्कुराने में, तो हो जाने दे। 
दर्द होता है गर कष्ट सहने में, तो हो जाने दे। 
पीड़ा होती है टूट जाने में, तो हो जाने दे। 
 डर लगता है गर अकेले चलने में, तो लग जाने दे। 
मजाक होती है चार लोगों में, तो हो जाने दे।
अरे….. शेर पैदा ही होते हैं, शिकार करने के लिए। 
ठंडी रगों में आग बनकर उभरने के लिए। 
हाँ-हाँ मैं तैयार हूँ, फेल होने के लिए। 
हाँ-हाँ मैं तैयार हूँ, निराशा के लिए। 


जो चाहा उसे हांसिल ना किया, तो क्या किया !
अपने सपनों को साकार ना किया, तो क्या किया !
दर्द, पीड़ा और दुःख को अपना दोस्त न कहा, तो क्या किया !
गर अपनी ही सोच ना बदल पाए, तो क्या किया !
चुनौती को अवसर ना बना पाए, तो क्या किया !
जिंदगी होती है, जोश, जूनून और जिंदादिली से जीने के लिए,
मौज, आनंद और मनोरंजन की चोटी को छूने के लिए। 
हाँ-हाँ मैं तैयार हूँ, फेल होने के लिए। 
हाँ-हाँ मैं तैयार हूँ, निराशा के लिए। 


चिंगारी भड़की है जिगर में, तो भड़क जाने दे। 
चोट पड़ी है अरमानों में, तो नितर जाने दे। 
आग सुलगी है रगों में, तो सुलग जाने दे। 
लहरें उठी हैं सांसो में, तो बिखर जाने दे। 
तूफ़ान उठा है गर धड़कनों में, तो धड़क जाने दे। 
सोले रवां हैं गर इरादों में, तो मचल जाने दे। 
अरे…. सूरमा होते ही हैं बदल जाने के लिए। 
अपनी औकात से बड़ा कर दिखने के लिए। 
हाँ-हाँ मैं तैयार हूँ, फेल होने के लिए। 
हाँ-हाँ मैं तैयार हूँ, निराशा के लिए।

 
अगर जिद है कुछ कर दिखने की मनों में,
लगाम तो रखनी ही होगी भावनाओं में। 
गर ख्वाहिश है समंदर की इन सांसो में ,
तो कंकड़ तो आएंगे ही अपनी राहों में। 
तब तो खुद के घमंड को भी खोना है , 
अपनी जिंदगी की डोर को, अपने हाथों में लेना है। 
मैं हूँ तैयार – अपना सबकुछ खोने के लिए,
मैं ही तो हूँ – अपना  खुदा होने के लिए। 
हाँ-हाँ मैं तैयार हूँ, फेल होने के लिए। 
हाँ-हाँ मैं तैयार हूँ, निराशा के लिए। |

Written by- Mahendra Singh Dhanak.

 

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