स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार | Swami Vivekananda Best Quotes In Hindi

स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार | Swami Vivekananda Best Quotes In Hindi

जो सत्य है उसे साहसपूर्वक निर्भीक होकर लोगों से कहो ! उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो | दुर्बलता को कभी स्वीकार मत करो, यह निर्भयता ही है जो क्षण भर में परम आनंद लाती है; सत्य की ज्योति बुद्धिमान मनुष्यों के लिए यदि अत्यधिक मात्रा में प्रखर प्रतीत होती है और उन्हें बहा ले जाती है, तो ले जाने दो; वे जितना शीघ्र बह जाएँ उतना अच्छा ही है |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

कुछ मत पूछो, बदले में कुछ मत मांगो | जो देना है वो दो, तुम्हारा दिया सबकुछ  तुमतक वापस आएगा, पर उसके बारे में कभी मत सोचो |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

हमारा कर्त्तव्य है कि हम हर किसीको उसका उच्चतम आदर्श जीवन जीने के संघर्ष
में प्रोत्साहन करें, और साथ ही साथ उस आदर्श को सत्य के जितना निकट हो
सके लाने का प्रयास करें |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

सभी को मरना है ! सज्जन भी मरेंगे और दुर्जन भी मरेंगे; गरीब भी मरेंगे और अमीर भी मरेंगे | इसलिए निष्कपट होकर जीवन जियो |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

एक विचार लो और उस विचार को अपनी जिंदगी बना लो, उसी विचार के बारे में सोचो, उसी के सपने देखो और उसी को जियो, अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, और शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकि सभी विचारों को किनारे रख दो, यही सफल होने का तरीका है |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

तुम भगवान में तबतक विश्वास नहीं कर सकते जबतक तुम खुद पर विश्वास नहीं करोगे |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

जिस क्षण मैंने यह जान लिया कि भगवान हर एक मानव शरीर रुपी मंदिर में
विराजमान है, जिस क्षण मैं हर व्यक्ति के सामने श्रद्धा से खड़ा हो गया और
उसके भीतर भगवान को देखने लगा – उसी क्षण से मैं सारे बन्धनों से मुक्त हूँ
! हर वो चीज जो बंधती है, नष्ट हो गयी और मैं स्वतंत्र हूँ |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वाभाव के प्रति सच्चे होना |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

किसी की  निंदा नहीं करनी चाहिए, अगर आप किसी की मदद को हाथ बढ़ा सकते हैं तो जरूर बढ़ाएं; अगर नही बढ़ा सकते तो अपने हाथ जोड़िये, अपने साथियों को आशीर्वाद दीजिये और उनको, उनके मार्ग पर जाने दीजिये |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

किसी मकसद के लिए खड़े हो तो एक पेड़ की तरह, गिरो तो एक बीज की तरह, ताकि दुबारा उगकर उसी मकसद के लिए फिर से जंग कर सको |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

ब्रम्हाण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं ! वो हम ही हैं जो अपना चेहरा हाथों से ढक लेते हैं और फिर कहते हैं कि  कितना अंधकार है |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

जो कुछ भी तुमको कमजोर बनता है चाहे वो शारीरिक हो, बौद्धिक हो या मानसिक; उसे उसी प्रकार त्याग दो जिस प्रकार तुम किसी स्थान को त्याग दिया करते हो |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

आपको अन्दर से बाहर की तरफ विकसित होना है | आपको कोई पढ़ा नही सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता, आपको सबकुछ खुद अन्दर से सीखना है | आपकी आत्मा के अलावा आपका कोई और  गुरु नहीं है |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

स्वयं में बहुत सी कमियों के बावजूद अगर मैं स्वयं से प्रेम कर सकता हूँ !
तो फिर दूसरों में थोड़ी बहुत कमियों की वजह से उनसे घृणा कैसे कर सकता हूँ |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

वेदांत कोई पाप नहीं जनता, वो केवल त्रुटी जनता है ! और वेदांत कहता है कि सबसे बड़ी त्रुटी यह कहना है कि तुम कमजोर हो, तुम पापी हो, तुम्हारे पास कोई शक्ति नहीं है और तुम ये या वो नहीं कर सकते |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

किसी दिन जब आपके सामने कोई समस्या ना आये तो आप समझ लेना की आप कुछ नया नहीं कर रहे हैं |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए हमेशा इस बात का विशेष
ध्यान रखिये कि आप क्या सोचते हैं; शब्द गौण हैं, विचार रहते हैं; वे दूर
तक जाते हैं |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

एक समय में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकि सबकुछ भूल जाओ |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है ! जबतक जीना तब तक सीखना |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है; अन्यथा ये
सिर्फ बुराई का एक ढ़ेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना
बेहतर है |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

जो बदले में कुछ नहीं मांगते, सच्ची सफलता और आनंद के मोती उन्हीं को मिलते हैं | पूर्ण रूप से निश्वार्थ प्राणी ही सही मायनों में सफल और सम्रद्ध हैं |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

जब लोग तुम्हें गाली दें तो तुम उन्हें दुवाएँ और आशीर्वाद दो | सोचो, तुम्हारे झूठे दंभ को बाहर निकालकर उन्होंने तुम्हारी कितनी मदद की है |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

स्वतंत्र होने का साहस करो, जहाँ तक तुम्हारे विचार जाते हैं, वहां तक जाने का साहस करो और उन विचारों को अपने जीवन में उतारने का साहस करो |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

यदि आप मेरे पास आकर किसी और की बुराई करते हैं तो मुझे संदेह नहीं की आप दूसरों के पास जाकर मेरी भी बुराई करते होंगे |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

हम जो बोते हैं वो काटते हैं, हम स्वयं अपने भाग्य के विधाता हैं, हवा बह रही है ….. वो जहाज जिनके पाल खुले हैं, इससे टकराते हैं और अपनी दिशा में आगे बढ़ जाते हैं पर जिनके पल बंधे हैं, हवा को नहीं पकड़ पाते | क्या यह हवा की गलती है ?….हम खुद अपना भाग्य बनाते हैं |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

दिन में कम से कम एक बार खुद से जरूर बात करें, अन्यथा आप एक उत्कृष्ट व्यक्ति के साथ एक बैठक गँवा देंगे |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

तुम मुझे पसंद करो या मुझसे नफ़रत ! दोनों ही मेरे पक्ष में हैं |  अगर तुम मुझको पसंद करते हो तो मैं  तुम्हारे दिल में हूँ | और अगर तुम मुझसे नफ़रत करते हो तो मैं तुम्हारे मन में हूँ |
~स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)




दोस्तों आपको स्वामी विवेकानंद जी के इन सभी विचारों से क्या नया सीखने मिला और उनका कौन सा विचार आपको सबसे अच्छा लगा नीचे COMMENT BOX में जरूर लिखें l

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